Tag: Life style
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अमृतस्य भोजन!
सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपाल नन्दनः आरोग्य का अर्थ होता है, संपन्न बनना। अपनी शक्तीयो को बढ़ाकर योग्य उपयोग करना। आरोग्य का अर्थ केवल भौतिक शरिर से संपन्न होने तक सीमीत नहीं है। आरोग्य का सही अर्थ होता है, मानसिक संपदा, सामाजिक आरोग्य अर्थात (किर्ती, यश), और आत्मसमाधान इन चारों स्तर पर आरोग्य का स्थान रहना…
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A latent light
।। तस्मिन् सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः।। हमारा जीवन जीने के लिए अन्न और जल जितना महत्व पूर्ण है, उतना ही महत्व पूर्ण है, वायु। क्या हम सिर्फ वायु के सहारे जिंदा रह सकते है क्या ? बिल्कुल ही नहीं। हम शरीर में नासिका के द्वारा वायु खींचते है, नही! बल्कि नासिका रंध्र से वायू के साथ…
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पूर्ण स्वास्थ होना है!
मै चाहता क्या हूं? जन्म और मृत्यु के बीच की अवस्था का नाम जीवन है। जीवन को समझने से पूर्व जन्म और मृत्यु के कारणों को समझना आवश्यक होता है। जिसके कारण हमारा जीव विभिन्न जीव स्तर पर भ्रमण करता है। जन्म और मृत्यु क्यों? कब ? कैसे और कहाँ होती है? उसका संचालन और…
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आध्यात्म योग
ज्ञान, कर्म, और उपासना का संयोग है “आध्यात्म” ज्ञान कर्म और उपासना, व्यक्ति इन तीनों से कभी भी खाली नहीं रहता। इन तीनों को शुद्ध बनाएं। तभी आपका इस जीवन का भविष्य तथा अगले जन्मों का भविष्य सुखदायक होगा। कर्मों का फल बहुत जटिल विषय है। बड़े-बड़े विद्वान इस विषय को ठीक से समझ नहीं…
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स्वस्थ जल, स्वस्थ जीवन।
जल ही जीवन हैं। हमारे शरीर का 70% भाग पानी है। शरीर से प्रतिदिन 2600 ग्राम पानी खर्च होता हैं। किडनी 1500 ग्राम, त्वचा 650 ग्राम, फेफड़े 320 ग्राम, मल मूत्र मार्ग 130 ग्राम, अंतः शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन कम से कम 2 से 3 लिटर पानी पीना…
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नेत्रम आरोग्यं।
जीते हुए अपने जीवन लक्ष्य को पाएं, यह सर्व मनुष्यात्माओं का परम कर्तव्य है। स्वस्थ रहना शरीर का नैसर्गिक स्वभाव एवं हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। कहा भी गया है पहला सुखनिरोगी काया । वास्तव में स्वास्थ्य जीवन की सबसे पहली आवश्यकता है। इसके बिना विपुल सम्पदा एवं वैभव सभी निरर्थक हैं। एक अस्वस्थ व्यक्ति स्वयं…
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स्वर चिकित्सा
प्राण उपासना “प्राण सूक्त” मनुष्य के शरीर का विज्ञान अदभूत हैं। मनुष्य के शरीर का हर एक अवयव अपने योग्य स्थान पर अपना कार्य सुचारू रूप से करता है। मानव शरीर यह वह मशीन है, जो आपका हर समय में आपका साथ निभाती है। हमारे शरीर के प्रत्येक क्रिया का वैज्ञानिक आधार होती है।अगर शरीर…
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हर सुबह नया जन्म हर रात एक मृत्यु।
मानव जीवन में समय का अलग ही महत्व है। समय किसी के भी वश में नहीं है। समय का चक्र निरंतर चलता रहता है। समय के साथ जीवन को जीना ही सफल माना जाता है। भारत के प्राचीन वैदिक काल की संस्कृती अपने चरम पर ज्ञान का प्रवाह करती प्रतित होती है। जिस संस्कृती ने…