Author: vivek

  • Cellular Regeneration

    ।। तपः स्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि क्रियायोगः ॥ योगदर्शन ( 2: 1) अध्यात्म एक ऐसा विज्ञान है, जिसमें सुनिश्चित साधनात्मक विधान को अपनाया जाता हैं। आध्यात्म विज्ञान में मनुष्य के भीतर पड़ी प्रसुप्त शक्तियों को जाग्रत कर अनंत ब्रह्मांड में व्याप्त ब्राह्मी चेतना को लिंग ब्रम्हांड में स्थापित करना होता हैं। इस दिव्य यात्रा को पूर्ण करने के…

  • Test of success

    Goal should be high and high Every person in life wants to be successful and success is also the birthright of every person, but in the blind race of success, when it becomes beyond understanding, then the person can not get happiness even after achieving success. In such a way, there are questions on success…

  • Sanskrit:- The language of God

    A celestial sounds If we look at the science of ancient India, then there is a grand vision of the vast culture of India. The education which teaches us and makes us aware, they are as follows, Survey Bhavantu Sukhin Survey Santu Niramaya This higher education is coming only and only from the Vedic period.…

  • Think beyond the pen!

    सूर्य और सविता मानवी अस्तित्व का सीधा संबंध “सवितु” शब्द से हैं। यहां आपको आपके जन्म का प्रयोजन समझने में सहायता मिलेगी। हमारे भीतर की चेतना का विस्तार अनंत हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण है, प्रकाश की ओर लौटना हमारा मूल स्वभाव हैं। यही प्रकाश ज्ञान और ऊर्जा रूपों में स्थित है। चेतना का विस्तार ही समग्रता…

  • स्वस्थता प्रदायक हैं तुलसी तुलसी एक दैविक वनस्पति है, इसलिए तुलसी का सनातन समाज में बहुत महत्व था। आज भी पूजा-पाठ में तुलसी के पत्तों की जरूरत पड़ती है। पंचामृत व चरणामृत, दोनों में तुलसी के पत्ते अनिवार्य हैं। एक समय था जब भारत के हर घर-आँगन में तुलसी का चौरा (तुलसी लगाने का स्थान)…

  • Inhale true “prana” The power within us is the name “consciousness” which works within the root. The work of Chetan is to control the root. There is full control over the root. Wherever it is a mixture of and animate, its name is life. Spirit is the part of God. Who do we breathe? No,…

  • Teleportation क्वांटम फिजिक्स में टेलिपोर्टेशन यह संकल्पना आज अपना स्वरुप साकार कर रही है। यह काफी संशोधन का विषय रहा है। इसी अविष्कार को लेकर विज्ञान जगत और चैतन्य आध्यात्म जगत में यह क्रांति है। इसी इनोव्हेशन में भारतीय सनातन संस्कृती का ज्ञान कैसे पिछे रह सकता है ? भारतीय सनातन पूर्णतः वैज्ञानिक तथ्यों पर…

  • सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपाल नन्दनः आरोग्य का अर्थ होता है, संपन्न बनना। अपनी शक्तीयो को बढ़ाकर योग्य उपयोग करना। आरोग्य का अर्थ केवल भौतिक शरिर से संपन्न होने तक सीमीत नहीं है। आरोग्य का सही अर्थ होता है, मानसिक संपदा, सामाजिक आरोग्य अर्थात (किर्ती, यश), और आत्मसमाधान इन चारों स्तर पर आरोग्य का स्थान रहना…

  • शुक्लं यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी सुत्र में उल्लेख है,“तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु“ इस सुत्र को हमे समझना होगा, शाब्दिक अर्थ को तो आप जानते ही होंगे। पर इस सुत्र को महाशिवरात्री के शुभ अवसर पर जिवन में पिरोना होगा। यह सुत्र हमे बताता है, और सिखाता है,अगर आप किसी हाथी पर बैठना चाहते हो तो उस हाथी…

  • शब्द सामर्थ्य आत्मोकर्षण के इस नए युग की नई परिभाषा में हमारे जीवन का कायाकल्प का युग आरंभ कर हो रहा हैं। यह अवसर शुभ संकल्प का हैं। यह शंखनाद का समय हमे जीवन के नए आयाम को आकर्षित कर रहा है। जीवन जीने की नई प्रेरणा प्रदान कर रहा है। जहां आपकी चेतना रूपी…

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