Category: Spirituality
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The art of self-realization
Increase your glow with self-confidence Today the circumstances are being attacked severely and cruelly on the human race. We are becoming slaves of those situations. We are getting entangled in the entanglements. Today we have forgotten, our original form is to be as bright as the sun. . We are born so that we can…
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Think beyond the pen!
सूर्य और सविता मानवी अस्तित्व का सीधा संबंध “सवितु” शब्द से हैं। यहां आपको आपके जन्म का प्रयोजन समझने में सहायता मिलेगी। हमारे भीतर की चेतना का विस्तार अनंत हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण है, प्रकाश की ओर लौटना हमारा मूल स्वभाव हैं। यही प्रकाश ज्ञान और ऊर्जा रूपों में स्थित है। चेतना का विस्तार ही समग्रता…
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ऑटो सजेशन” की अनोखी पहल है, “तुलसी”
स्वस्थता प्रदायक हैं तुलसी तुलसी एक दैविक वनस्पति है, इसलिए तुलसी का सनातन समाज में बहुत महत्व था। आज भी पूजा-पाठ में तुलसी के पत्तों की जरूरत पड़ती है। पंचामृत व चरणामृत, दोनों में तुलसी के पत्ते अनिवार्य हैं। एक समय था जब भारत के हर घर-आँगन में तुलसी का चौरा (तुलसी लगाने का स्थान)…
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Cosmic Medicine
Inhale true “prana” The power within us is the name “consciousness” which works within the root. The work of Chetan is to control the root. There is full control over the root. Wherever it is a mixture of and animate, its name is life. Spirit is the part of God. Who do we breathe? No,…
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E= mc2
Teleportation क्वांटम फिजिक्स में टेलिपोर्टेशन यह संकल्पना आज अपना स्वरुप साकार कर रही है। यह काफी संशोधन का विषय रहा है। इसी अविष्कार को लेकर विज्ञान जगत और चैतन्य आध्यात्म जगत में यह क्रांति है। इसी इनोव्हेशन में भारतीय सनातन संस्कृती का ज्ञान कैसे पिछे रह सकता है ? भारतीय सनातन पूर्णतः वैज्ञानिक तथ्यों पर…
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अमृतस्य भोजन!
सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपाल नन्दनः आरोग्य का अर्थ होता है, संपन्न बनना। अपनी शक्तीयो को बढ़ाकर योग्य उपयोग करना। आरोग्य का अर्थ केवल भौतिक शरिर से संपन्न होने तक सीमीत नहीं है। आरोग्य का सही अर्थ होता है, मानसिक संपदा, सामाजिक आरोग्य अर्थात (किर्ती, यश), और आत्मसमाधान इन चारों स्तर पर आरोग्य का स्थान रहना…
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A latent light
।। तस्मिन् सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः।। हमारा जीवन जीने के लिए अन्न और जल जितना महत्व पूर्ण है, उतना ही महत्व पूर्ण है, वायु। क्या हम सिर्फ वायु के सहारे जिंदा रह सकते है क्या ? बिल्कुल ही नहीं। हम शरीर में नासिका के द्वारा वायु खींचते है, नही! बल्कि नासिका रंध्र से वायू के साथ…
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A win win attitude
मानवी व्यक्तित्व में अन्तनिहित समग्रता! पदार्थवादी दृष्टिकोण वाले बौद्धिक मनुष्य को जैव रासायनिक संयोगों का एक आकस्मिक समुच्चय ही मानते रहे हैं। उस स्थिति में सम्पूर्ण व्यक्तित्व की किसी विशिष्ट एक सूत्र का प्रश्न ही नहीं उठता। रंग, रक्त, शरीरस्थ रसों आदि की दृष्टि से निश्चित वर्गों का निर्धारण हो जाने पर तो यह और…
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आयु + वेद = आयुर्वेद
मां प्रकृति का धन्यवाद करना सीखाता, “आयुर्वेद” मां प्रकृति ने मनुष्य के लिए हर वस्तु उत्पन्न की है। जीवन को जीने के लिए प्राण वायु, शक्ती के लिए अन्न। मां प्रकृति हमारी हर एक जरूरत को पूर्ण करती है। वो कभी आपदा के रुप में कहर बनकर टूट पड़ती है तो भी हमारी मदद करती…
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चेतना विकास और विज्ञान
।अथ योगानुशासनम्। मनुष्य का जीवन साधना पथ हैं। साधना के साथ आपको खुद को साधना होता हैं। परम शक्ति का यह उपहार है मनुष्य जीवन। जिसका हर एक कार्य, कर्म, विचार उस ब्रम्हांडिय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता हैं। क्यूकि परम शक्ति बाहर नहीं अपने भीतर हैं। यह केवल बात करने का कार्य नही है। यह…