Tag: Bhagvat Gita

  • Self Inspection

    Self Inspection

    You get some great, amazingly fantastic news. What’s the first thing you do? Know real I If a man wants to make his life divine, noble, ideal, and great, then he should introspect every day before sleep and look into his innermost to see what faults and mistakes he has made throughout the day. Think…

  • Adjusting the inner frequency – 2

    Adjusting the inner frequency – 2

    Happiness is a state of mind. If a question is asked, there is also an answer. We spend our whole lives looking for happiness in material things, thinking that a big bank balance, a luxurious house, and a beautiful wife are the key to happiness… but we still don’t find that happiness. You are not…

  • Self realiazation

    Achievement of goal Faith is a great power. If there is a deep faith in the mind, then even the most difficult path can be taken forward, and if there is no such faith, then the steps taken on any path in life start going on downward. The mind was terrified by all kinds of…

  • अमृतस्य भोजन!

    सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपाल नन्दनः आरोग्य का अर्थ होता है, संपन्न बनना। अपनी शक्तीयो को बढ़ाकर योग्य उपयोग करना। आरोग्य का अर्थ केवल भौतिक शरिर से संपन्न होने तक सीमीत नहीं है। आरोग्य का सही अर्थ होता है, मानसिक संपदा, सामाजिक आरोग्य अर्थात (किर्ती, यश), और आत्मसमाधान इन चारों स्तर पर आरोग्य का स्थान रहना…

  • Shiv Sutra : Power to choose !!

    शुक्लं यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी सुत्र में उल्लेख है,“तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु“ इस सुत्र को हमे समझना होगा, शाब्दिक अर्थ को तो आप जानते ही होंगे। पर इस सुत्र को महाशिवरात्री के शुभ अवसर पर जिवन में पिरोना होगा। यह सुत्र हमे बताता है, और सिखाता है,अगर आप किसी हाथी पर बैठना चाहते हो तो उस हाथी…

  • चेतना विकास और विज्ञान

    ।अथ योगानुशासनम्। मनुष्य का जीवन साधना पथ हैं। साधना के साथ आपको खुद को साधना होता हैं। परम शक्ति का यह उपहार है मनुष्य जीवन। जिसका हर एक कार्य, कर्म, विचार उस ब्रम्हांडिय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता हैं। क्यूकि परम शक्ति बाहर नहीं अपने भीतर हैं। यह केवल बात करने का कार्य नही है। यह…

  • आध्यात्म योग

    ज्ञान, कर्म, और उपासना का संयोग है “आध्यात्म” ज्ञान कर्म और उपासना, व्यक्ति इन तीनों से कभी भी खाली नहीं रहता। इन तीनों को शुद्ध बनाएं। तभी आपका इस जीवन का भविष्य तथा अगले जन्मों का भविष्य सुखदायक होगा। कर्मों का फल बहुत जटिल विषय है। बड़े-बड़े विद्वान इस विषय को ठीक से समझ नहीं…

  • Miracles of words!

    समर्थ गुरु रामदास का यह कथन सत्य है कि संसार भर में हमारे मित्र मौजूद हैं; किन्तु उन्हें प्राप्त करने की कुंजी जिह्वा के “कपाट” में बन्द है। मनुष्य की शिक्षा, सभ्यता, संस्कृति, बुद्धिमत्ता, चतुरता, विचारशीलता एवं दूरदर्शिता उसकी वाणी के माध्यम से ही दूसरों पर प्रकट होती रहती है। समाज में प्रतिष्ठा और प्रामाणिकता…

  • वसंत कुसुमाकर।

    भारतीय संस्कृति अपने आप में एक अनोखा विज्ञान है। जिसकी तुलना नहीं की जा सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित बनाएं रखने के लिए हमे जागरूक रहना होगा। यह संस्कृति हमे कर्मकाण्ड का आधार प्रदान करती है। कर्मकांड भी विज्ञान है खुद को मंत्र के साथ पिरोने का। वसंत ऋतु का आगमन ही विद्यारंभ संस्कार…

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